वर्धा, 5 अगस्त, 2026
प्रधानमंत्री सूर्यघर–मुफ्त बिजली योजना’ ने वर्धा जिले में हरित ऊर्जा की नई क्रांति ला दी है। इस योजना के तहत हजारों परिवार न केवल बिजली बिल से राहत पा रहे हैं, बल्कि अब स्वयं बिजली उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। महावितरण के जनजागरण अभियान के सकारात्मक परिणामस्वरूप जिले में सौर ऊर्जा अपनाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
जिले में अब तक 21,783 उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। इन संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता 78.44 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि 19,856 उपभोक्ताओं के बैंक खातों में केंद्र सरकार की ओर से 153.14 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे जमा की जा चुकी है। वहीं 21,105 उपभोक्ता कुल 162.80 करोड़ रुपये की सब्सिडी के पात्र हैं।
महावितरण के अनुसार योजना के तहत 1 किलोवाट पर 30 हजार रुपये, 2 किलोवाट पर 60 हजार रुपये और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। सौर संयंत्र पर किया गया निवेश केवल 3 से 4 वर्षों में बिजली बिल की बचत से वसूल हो जाता है, जबकि अगले 20 से 25 वर्षों तक उपभोक्ताओं को लगभग मुफ्त बिजली का लाभ मिलता है।
योजना की सबसे बड़ी खासियत नेट मीटरिंग है। यदि उपभोक्ता जरूरत से अधिक बिजली पैदा करता है, तो अतिरिक्त बिजली महावितरण के ग्रिड में भेजी जाती है और उसका मूल्य बिजली बिल में समायोजित किया जाता है। यानी अब उपभोक्ता केवल बिजली का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक भी बन रहा है।
वर्धा जिले के चिचघाट-राठी (हिंगणघाट), नेरी पुनर्वसन (आर्वी) और रायपुर (वर्धा) गांवों ने इस योजना में शत-प्रतिशत भागीदारी कर ‘सौर ग्राम’ का दर्जा हासिल किया है। इन गांवों के अधिकांश घर अब सौर ऊर्जा से रोशन हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है।
