वर्धा, 3 अगस्त 2026
बारिश का अधिकांश पानी सड़कों से बहकर निकल जाता है, जिससे जल संकट की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यदि बारिश के पानी को जमीन में रिसाया जाए तो भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसी उद्देश्य से वर्धा नगर परिषद और वैद्यकीय जनजागृति मंच (वीजेएम) के संयुक्त तत्वावधान में धुनीवाले मठ से पावडे चौक तक ‘स्पंज सिटी’ प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसकी जानकारी नगराध्यक्ष सुधीर पांगूल और वैद्यकीय जनजागृति मंच के अध्यक्ष डॉ. सचिन पावडे ने सोमवार को वर्धा नगर परिषद में आयोजित पत्रकार परिषद में दी।
वैद्यकीय जनजागृति मंच के अध्यक्ष डॉ. सचिन पावडे ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य बहते पानी को नियंत्रित करना, उसे रोकना और रुके हुए पानी को जमीन में समाहित करना है। इसके तहत शहर की खाली जगहों तथा सड़कों के किनारे नगर परिषद के निर्णयानुसार गड्ढे बनाए जाएंगे, जिनमें वर्षा का बहता पानी एकत्र होकर जमीन में रिस सकेगा। इससे शहर का भूजल स्तर बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
पत्रकार परिषद में वैद्यकीय जनजागृति मंच के अध्यक्ष डॉ. सचिन पावडे ने बताया कि शहरों में सड़कें, नालियां और घरों के आंगन बड़े पैमाने पर सीमेंट-कंक्रीट से बनाए जाने के कारण वर्षा जल सीधे बह जाता है। इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और खुली जमीन पर गिरने वाला पानी वहीं जमीन में समा जाता है। विकसित देशों में भी वर्षा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन हमारे यहां वर्षा का पानी बिना उपयोग के बह जाने दिया जाता है। भविष्य में जल संकट से बचने के लिए भूजल पुनर्भरण अत्यंत आवश्यक है।
वैद्यकीय जनजागृति मंच के अध्यक्ष डॉ. सचिन पावडे ने बताया कि पहले लगभग 100 फीट की गहराई पर पानी मिल जाता था, लेकिन अब लगभग हर घर में बोरवेल होने के कारण भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और इसका असर जमीन के तापमान पर भी पड़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
