महेंद्री अभयारण्य के लिए सांसद काले ने….

Amravati अमरावती 14 जून
महेंद्री अभयारण्य परियोजना के अंतर्गत अमरावती जिले के वरुड तहसील के अनेक किसानों की उपजाऊ भूमि अधिग्रहित होने जा रही है। इस संदर्भ में किसानों की भूमि तथा गांवों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर पहले किसानों से चर्चा कर उनकी मांगों पर निर्णय लिया जाए और उसके बाद ही पुनर्वास एवं भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लागू की जाए। यह मांग सांसद अमर काळे ने वन मंत्री गणेश नाईक को पत्र लिखकर की है।

महेंद्री अभयारण्य के कारण वरुड तहसील की कृषि भूमि तथा कुछ गांवों का पुनर्वास किया जाना है। स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझने के उद्देश्य से सांसद अमर काळे ने इस क्षेत्र में नागरिकों के साथ दो बार बैठकें आयोजित की थीं। इन बैठकों में लोगों की प्रतिक्रियाएं और सुझाव जानने पर यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय लोगों को अभयारण्य परियोजना से कोई विरोध नहीं है। हालांकि, किसानों और नागरिकों का कहना है कि पुनर्वास और भूमि अधिग्रहण से पहले उनकी मांगों पर सरकार द्वारा उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

सांसद अमर काळे द्वारा आयोजित बैठकों में किसानों ने मांग की कि उनकी कृषि भूमि का मुआवजा रेडी रेकनर दर के बजाय वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर दिया जाए। पुनर्वास अच्छी जगह पर और बेहतर सुविधाओं के साथ किया जाए। चूंकि यहां के अधिकांश लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है, इसलिए जिन किसानों की भूमि इस परियोजना में जाएगी, उन्हें खेती के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई जाए।

इसके अलावा किसानों ने मांग की कि परियोजना प्रभावितों को “प्रकल्पग्रस्त प्रमाणपत्र” दिया जाए। अभयारण्य में सृजित होने वाली नौकरियों में परियोजना प्रभावितों के लिए विशेष आरक्षण रखा जाए तथा अन्य सरकारी नौकरियों में भी उन्हें प्राथमिकता दी जाए। महेंद्री परियोजना से उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों में परियोजना प्रभावितों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। वन्य प्राणियों से होने वाले नुकसान के मुआवजे में वृद्धि की जाए तथा पर्यटन विकास से जुड़े रोजगारों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए।

स्थानीय किसानों ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस परियोजना का विरोध नहीं है, लेकिन सरकार की ओर से उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। यही उनकी प्रमुख अपेक्षा है।

बैठक के दौरान सांसद अमर काळे ने नागरिकों की सभी मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इन मांगों को सरकार तक पहुंचाकर उनका उचित समाधान कराने के लिए प्रयास करेंगे। इसी क्रम में उन्होंने तत्काल राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक को पत्र लिखकर किसानों और स्थानीय नागरिकों की सभी मांगों से अवगत कराया।

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