भारत पाक युद्ध में काम आया था ये रास्ता

  • संसद अमर काले के प्रयास रंग लाए
  • जो कोई नहीं कर पाया वो काले ने कर डाला
  • जिले का होगा विकास

wardha आर्वी : पुलगांव–आर्वी नैरोगेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में परिवर्तित कर उसे वरुड तक विस्तारित करने का कार्य अंततः सांसद अमर काले के सतत प्रयासों और पत्राचार के कारण आगे बढ़ा है। रेल मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए बजट में 2.49 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है।

पुलगांव–आर्वी नैरोगेज रेल मार्ग की शुरुआत वर्ष 1917 में अंग्रेजों के समय हुई थी और यह वर्ष 2005 तक चालू रही। इसके बाद अचानक सेवा बंद होने से आर्वी, आष्टी और कारंजा क्षेत्र रेल सुविधा से वंचित हो गए। आर्वी विदर्भ का एक महत्वपूर्ण कपास बाजार होने के कारण यह रेल मार्ग माल परिवहन तथा मध्य रेलवे लाइन से संपर्क के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।

सांसद अमर काले ने मार्च 2025 के संसदीय सत्र में इस मुद्दे को लोकसभा में उठाया। इसके साथ ही उन्होंने रेल मंत्री से लगातार मुलाकात और पत्राचार भी जारी रखा। पुनः मार्च 2026 के सत्र में उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि नागपुर मार्ग की तुलना में पुलगांव–आर्वी–वरुड मार्ग से वर्धा से आमला की दूरी 105 किलोमीटर कम हो जाएगी।

साथ ही, वर्ष 1971 के युद्ध के दौरान पुलगांव मिलिट्री डिपो से सामग्री को आमला डिपो तक स्थानांतरित करने के लिए इस मार्ग को अधिक सुरक्षित और कम दूरी वाला पाया गया था। लष्करी विभाग के आकलन के अनुसार पुलगांव–नागपुर–आमला मार्ग सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं था और दूरी भी 105 किलोमीटर अधिक थी। इसलिए पुलगांव–आर्वी–वरुड–आमला मार्ग को अधिक सुरक्षित माना गया और उसी के माध्यम से सामग्री स्थानांतरित की गई थी। इस तथ्य को सांसद अमर काले ने लोकसभा में प्रस्तुत किया।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस विषय की गंभीरता को समझते हुए पुलगांव–आर्वी मार्ग को ब्रॉडगेज में परिवर्तित कर उसे वरुड तक बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके लिए बजट में 2.49 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

पुलगांव से आर्वी तक ब्रॉडगेज के लिए आवश्यक स्टेशन और बुनियादी ढांचा पहले से उपलब्ध है, जिससे भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी। रेलवे विभाग द्वारा स्टेशन निर्धारण, यातायात सर्वेक्षण और रेल लाइन अलाइनमेंट का कार्य पूरा कर प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है।

इस निर्णय से आर्वी, आष्टी, कारंजा और वरुड क्षेत्र के लोगों को रेल सुविधा मिलने की उम्मीद फिर से जाग उठी है। लंबे समय से लंबित यह मांग अब पूरी होने की दिशा में बढ़ रही है।

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