सावधान विदर्भ में दो दिन मौसम….

Nagpur नागपुर, 26 फरवरी
वर्तमान में राज्य के कुछ हिस्सों में आंशिक बादली मौसम है और यह स्थिति इस सप्ताह बनी रहने की संभावना है। राज्य के दक्षिणी हिस्सों में दोपहर के बाद स्थानीय स्वरूप की आंधी बारिश हो सकती है।

यह बारिश मुख्य रूप से कर्नाटक और तेलंगाना सीमावर्ती मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने की संभावना है।30 मार्च के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में मुख्य रूप से दोपहर के बाद बादली मौसम बनने पर गरज-चमक के साथ बारिश और आंधी हवाओं की स्थिति बनने का प्राथमिक अनुमान है।

वर्तमान अनुमान के अनुसार यह स्थिति मुख्य रूप से खानदेश, मराठवाड़ा, पश्चिम विदर्भ तथा मध्य महाराष्ट्र के हिस्सों में दिख सकती है। शेष विदर्भ में भी मौसम में बदलाव दिख सकता है। इस दौरान बिजली की कड़क, आंधी हवाएं, बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना नकारा नहीं जा सकता। 31 मार्च को भी राज्य के कुछ हिस्सों में इस मौसम का प्रभाव दिख सकता है।किसानों को अगले कुछ दिनों में मौसम के अद्यतन पूर्वानुमानों पर नजर रखनी चाहिए और उसके अनुसार खेती के कार्य नियोजित करने चाहिए।

वर्तमान में रबी फसलों की कटाई चल रही है इसलिए किसानों को कटाई की गई फसलें सुरक्षित स्थान पर संग्रहित रखनी चाहिए या ढकने की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही आंधी हवाओं, बारिश और संभावित ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए, ऐसा कृषि विभाग की ओर से आवाहन किया जा रहा है। 200 शब्दों में अनुवाद करे

30-31 मार्च को महाराष्ट्र में गरज-चमक के साथ आंधी-बारिश की संभावना है। किसानों को कटाई वाली फसलों को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।

मौसम पूर्वानुमान

मुंबई, 25 मार्च। राज्य के कुछ भागों में आंशिक बादली स्थिति इस सप्ताह बनी रहेगी। दक्षिणी क्षेत्रों में दोपहर बाद स्थानीय आंधी-बारिश हो सकती है, खासकर कर्नाटक-तेलंगाना सीमा से लगे मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ के हिस्सों में। 30 मार्च को खानदेश, मराठवाड़ा, पश्चिम विदर्भ व मध्य महाराष्ट्र में बादल छाएंगे। गरज-चमक, तेज हवाएं, बारिश व कुछ जगहों पर ओलावृष्टि संभव है। 31 मार्च को भी असर रहेगा।

किसानों के लिए सलाह

कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि रबी फसलों की कटाई चल रही है। कटी फसलें सुरक्षित स्थान पर रखें या तिरपाल से ढकें। मौसम अपडेट पर नजर रखें व खेती कार्य योजना बनाएं। आंधी, बारिश व ओलों से नुकसान रोकने हेतु सावधानी बरतें। पशुओं को सुरक्षित रखें व जल निकासी सुनिश्चित करें।

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