सड़क पर तड़पते युवकों के लिए “मसीहा” बने सांसद काले

  • इंसानियत की मिसाल
  • खून से लथपथ युवकों को कार में बैठाया
  • हॉस्पिटल लेकर खुद गए सांसद काले

wardha वर्धा , 7 मई
सारवाड़ी घाट के पास हुए भीषण सड़क हादसे में घायल दो युवकों की जान बचाकर सांसद अमर काळे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सत्ता और पद से ऊपर सबसे बड़ा धर्म इंसानियत होता है। सड़क किनारे खून से लथपथ पड़े युवकों के बीच जब अधिकांश वाहन गुजरते रहे, तब एक संवेदनशील नेता ने रुककर न सिर्फ मदद की, बल्कि उन्हें जीवनदान भी दिया।

सड़क पर बिखरा दर्द, लेकिन मदद का इंतजार लंबा नहीं रहा
दोपहर लगभग 5 बजे नागपुर से अमरावती जा रहे दो युवा बाइक फिसलने से गंभीर रूप से घायल हो गए। राष्ट्रीय राजमार्ग होने के बावजूद, लगातार वाहनों की आवाजाही के बीच दोनों युवक घंटों तक सड़क किनारे दर्द से कराहते रहे। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान किसी ने भी उन्हें तुरंत मदद देने की पहल नहीं की।इसी दौरान सांसद अमर काळे अपने दौरे से लौट रहे थे। जैसे ही उनकी नजर इस दर्दनाक दृश्य पर पड़ी, उन्होंने बिना समय गंवाए अपना काफिला रुकवा दिया।

बिना झिझक उतरे गाड़ी से, खुद उठाया घायलों को
सांसद अमर काळे ने औपचारिकताओं को किनारे रखकर सीधे घायलों के पास पहुंचकर उनकी स्थिति जानी। गंभीर हालत को देखते हुए उन्होंने दोनों युवकों को तुरंत अपनी गाड़ी में बैठाया और उपजिला अस्पताल पहुंचाया।अस्पताल में भी उनकी संवेदनशीलता कम नहीं हुई। वे डॉक्टरों द्वारा प्राथमिक उपचार के दौरान वहीं मौजूद रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी। बाद में दोनों को बेहतर इलाज के लिए अमरावती रेफर किया गया।

एमबीबीएस छात्र थे दोनों घायल
जानकारी के अनुसार, घायल दोनों युवक एमबीबीएस के छात्र हैं। इनमें से एक नागपुर और दूसरा गोंदिया का निवासी है। दुर्घटना के बाद दोनों की स्थिति बेहद नाजुक थी, लेकिन समय पर मिली मदद ने उनकी जान बचा ली।“वे हमारे लिए भगवान बनकर आए” — भावुक छात्रघायल युवकों ने भावुक होकर कहा,“अगर अमर काळे समय पर मदद नहीं करते, तो शायद हम आज जीवित नहीं होते। वे हमारे लिए भगवान बनकर आए।

”सादगी ने जीता दिल, संवेदनशीलता बनी पहचान
आज के दौर में जहां नेताओं की पहचान सुरक्षा घेरे और औपचारिकताओं से होती है, वहीं अमर काळे ने एक अलग छवि पेश की है। बिना किसी दिखावे के, उन्होंने सड़क पर उतरकर जो कदम उठाया, उसने लोगों का दिल छू लिया।राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज, संत तुकाराम महाराज और मेहेरबाबा की शिक्षाओं से प्रेरित उनका यह व्यवहार एक बार फिर उनकी मानवीय सोच को दर्शाता है।

“दो जानें नहीं, दो भविष्य बचाए गए”
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद अमर काळे ने सिर्फ दो युवकों की जान नहीं बचाई, बल्कि भविष्य में हजारों मरीजों का इलाज करने वाले दो भावी डॉक्टरों को जीवनदान दिया है। इस घटना ने समाज में मानवता और सेवा का संदेश मजबूत किया है।जमीनी नेता की पहचानबताया जाता है कि सेवा और मदद का यह संस्कार उन्हें उनके परिवार से मिला है। उनकी माता अनुराधा काकू और डॉ. शरदराव काळे के मार्गदर्शन ने उनके व्यक्तित्व को संवेदनशील बनाया है। वहीं उनकी पत्नी . मयुराताई काळे भी सामाजिक कार्यों में निरंतर सहयोग देती हैं।यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राजनीति में भी यदि संवेदनशीलता जीवित हो, तो वह सीधे जीवन बचाने का माध्यम बन सकती है।

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