सड़क हादसों में वर्धा ट्रैफिक पुलिस बनेगी जीवन रक्षक

wardha वर्धा, 28 जनवरी
सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से वर्धा पुलिस प्रशासन ने अहम पहल की है। पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार अग्रवाल की संकल्पना से यातायात शाखा के अमलदारों के लिए प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 28 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे आयोजित हुआ।

एम्बुलेंस आने तक कैसे बचाई जाए जान

यातायात पुलिसकर्मी रोज़ सड़कों पर ड्यूटी के दौरान सबसे पहले दुर्घटनास्थल पर पहुँचते हैं। ऐसे में डायल 108 एम्बुलेंस के आने तक घायल को तत्काल और सही प्राथमिक उपचार कैसे दिया जाए, इस पर शासकीय डॉक्टरों ने विस्तार से मार्गदर्शन किया और प्रात्यक्षिक प्रशिक्षण भी दिया।

घायल को उठाने से लेकर सांस जांचने तक की ट्रेनिंग

डॉक्टरों ने बताया कि घायल को सड़क से हटाते समय तीन से चार लोगों द्वारा एक साथ सावधानीपूर्वक उठाना, गर्दन और सिर को पूरा सहारा देना जरूरी है। अत्यधिक रक्तस्राव होने पर पट्टी से दबाव देना, घायल की सांस चल रही है या नहीं इसकी तुरंत जांच, और होश में होने पर उसे मानसिक-शारीरिक संबल देना बेहद अहम है। साथ ही तुरंत डायल 108 पर कॉल करने पर जोर दिया गया।

‘गोल्डन आवर’ में इलाज सबसे जरूरी

चिकित्सकों ने बताया कि दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा यानी गोल्डन आवर घायल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस समय इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसलिए बिना देरी किए घायल को नजदीकी शासकीय या निजी अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। किसी भी आम नागरिक को घायल को अस्पताल ले जाने का अधिकार है।

कार्यशाला में सरकार द्वारा शुरू किए गए Good Samaritan App की जानकारी दी गई, जिसमें दुर्घटनास्थल के फोटो-वीडियो अपलोड कर शासकीय सहायता मिल सकती है। वहीं राहवीर योजना के तहत घायल को समय पर अस्पताल पहुँचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये, और किसी संस्था या टीम द्वारा जान बचाने पर 1.5 लाख रुपये के पुरस्कार की जानकारी भी दी गई।

CPR का लाइव डेमो

अगर घायल की सांस बंद हो जाए, तो CPR तकनीक से कृत्रिम सांस देकर हृदय और फेफड़ों को सक्रिय रखने का प्रशिक्षण भी डॉक्टरों ने प्रत्यक्ष रूप से दिया। इन डॉक्टरों ने दिया प्रशिक्षण

यह प्रशिक्षण
डॉ. श्रद्धा पटेल, डॉ. योगेश चांदुरकर, डॉ. प्रणय तड्स (CPR इमरजेंसी मैनेजमेंट, सेवाग्राम अस्पताल)
और
डॉ. सुबोध कुमार, डॉ. पवन भगत (जिला शासकीय अस्पताल, वर्धा)
द्वारा दिया गया। साथ ही डायल 108 एम्बुलेंस की कार्यप्रणाली का भी प्रदर्शन किया गया।

इन अधिकारियों का रहा योगदान

कार्यक्रम को सफल बनाने में
पुलिस निरीक्षक विलास पाटील, पुलिस उपनिरीक्षक अमोल लगड, एएसआई रियाज खान, दिलीप कामडी, संजय भांडेकर, मुन्ना तिवारी और किशोर पाटील ने विशेष परिश्रम लिया।

👉 इस प्रशिक्षण के बाद यातायात पुलिसकर्मी अब केवल ट्रैफिक संभालने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पहले जीवन रक्षक की भूमिका निभाने के लिए भी पूरी तरह तैयार रहेंगे।

पुलिस निरीक्षक विलास पाटील
यातायात नियंत्रण शाखा, वर्धा

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