वर्धा के बाद अमरावती के पालकमंत्री को भी सुननी पड़ी….

  • सासंद अमर काले ने बुलंद की अपनी आवाज
  • सांसद ने कहा निधि वितरण में नहीं चलेगा पक्षपात

Amravati अमरावती, 25 जनवरी
वर्धा ज़िले की नियोजन समिति की बैठक में समान निधि वितरण को लेकर नाराज़ सांसद अमर काले ने अमरावती की नियोजन समिति में भी अपना रौद्र रूप दिखाया। साथ ही सत्तारूढ़ दल पर निधि वितरण में पक्षपात का आरोप लगाया। जिसके बाद पालक मंत्री बावनकुले को  भी सांसद अमर काले की बात सुननी पड़ी, वर्धा के पालक मंत्री डॉ. पंकज भोयर की अध्यक्षता में हुई बैठक को सांसद काले ने बीच में ही रुकवा दिया था और जब तक आश्वासन नहीं मिला, तब तक बैठक की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दी थी।

अमरावती ज़िला नियोजन समिति की बैठक पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में आयोजित की गई। सभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी गुट) के सांसद अमर काले भी उपस्थित थे। सभा में सांसद काले ने 31 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव रखे थे, लेकिन एक भी काम को मंज़ूरी नहीं दी गई।

इस बात को लेकर सांसद अमर काले ने नाराज़गी जताई। सभा में अमर काले ने आरोप लगाया कि तीन-चार पत्र देने के बाद भी ज़िलाधिकारी की ओर से कोई भी जानकारी नहीं दी गई। सांसद काले ने बैठक में कहा कि क्या एक जनप्रतिनिधि के नाते विकास कार्यों के प्रस्ताव देने का उनका अधिकार नहीं है?

सांसद अमर काले की आक्रामक भूमिका को देखते हुए पालक मंत्री बावनकुले ने सांसद  अमर काले की पूरी बात सुनी और प्रस्तावित कार्यों के लिए निधि देने का आश्वासन दिया। इस बैठक में बावनकुले  ने काले  की  बातों को सकारात्मक लिया,

सभा में सांसद काले ने वन्यप्राणियों से खेती को होने वाले नुकसान का भी मुद्दा उठाया। दो वर्षों में केवल चार किसानों को ही मुआवज़ा दिया गया है। इसे अधोरेखित करते हुए उन्होंने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

सांसद काले ने बताया कि अतिवृष्टि में ढह गए सिंचाई कुओं की मरम्मत के लिए शासन ने मदद का आदेश जारी किया है, लेकिन अब तक संबंधित विभाग ने पंचनामा रिपोर्ट ही तैयार नहीं की है। इन मुद्दों पर पालक मंत्री बावनकुले ने तत्काल जानकारी इकट्ठा कर वन विभाग के पास प्रस्ताव भेजने के आदेश दिए।

वर्धा की नियोजन समिति के बाद अमरावती की समिति बैठक में सांसद अमर काले ने विकास और जनता के हित में आवाज़ बुलंद कर यह साबित कर दिया है कि सत्ता भले ही एकछत्र हो, लेकिन जनता के हित में विपक्ष की आवाज़ दबाई नहीं जा सकती।

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