रुचिरा धोंगडे कैनवास पर श्रद्धा आधुनिकता का अद्भुत संगम​

अभयकुमार बेदमोहता
wardha सेलु 16 जनवरी
कहते हैं कि कला को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता, और इसी बात को सच कर दिखाया है सेलू तहसील के ‘प्रतिपंढरी’ कहलानेवाले घोराड की उभरती कलाकार रुचिरा अजय धोंगडे ने, जो कि कक्षा 11वीं की छात्रा है. उसने अपनी चित्रकला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, अटूट श्रद्धा और आधुनिक सृजनशीलता का एक ऐसा मेल प्रस्तुत किया है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध है।​
रुचिरा की कलाकृतियों में विविधता का अद्भुत भंडार है। उनके द्वारा बनाए गए चित्रों में जहाँ एक ओर राजदरबारी वैभव और ऐतिहासिक भव्यता झलकती है, वहीं दूसरी ओर देवी-देवताओं के भक्तिपूर्ण रूप मन को शांति प्रदान करते हैं। विशेष रूप से, भगवान श्री गणेश के चित्रण में उन्होंने पारंपरिक रंगों के साथ-साथ ‘मॉडर्न आर्ट’ का जो प्रयोग किया है, वह उनकी परिपक्व सोच को दर्शाता है।

चित्रों के जरिए मराठी संस्कृति और समृद्ध इतिहास को जीवंत करना कहा जा सकता हैं।​ युवाओं में लोकप्रिय ‘अनीमे’ आर्ट को अपनी शैली में ढालकर आधुनिक कला के प्रति अपनी पकड़ साबित की।​ बगैर किसी औपचारिक प्रशिक्षण के रंगों का चयन और रेखाओं की शुद्धता वाकई काबिले तारीफ है।​”ग्रामीण क्षेत्र की इस प्रतिभा ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में लगन हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती।

रुचिरा की मेहनत और उसकी कलात्मक दृष्टि उन्हें भविष्य में एक महान कलाकार बनाएगी।”​बिना प्रशिक्षण के रचा इतिहास​रुचिरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि, उसने यह मुकाम बिना किसी विशेष कोचिंग या प्रशिक्षण के हासिल किया है। अपनी कल्पना शक्ति और निरंतर अभ्यास के बल पर उसने खुद को एक कुशल कलाकार के रूप में स्थापित किया है। उसकी यह उपलब्धि न केवल घोराड गांव के लिए, बल्कि पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।​भविष्य में रुचिरा कला के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएं, यही सबकी कामना है।

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