रेल पटरियों पर चलते साइकिल के पहिए

wardha वर्धा, 14 जनवरी
शिक्षा को सुलभ बनाने के दावे भले ही किए जा रहे हों, लेकिन पुलगांव शहर में विद्यार्थियों की जान जोखिम में है. यहां आज भी दर्जनों विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज पहुंचने के लिए रोज़ अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं.

पुलगांव में तीन वर्षों से रेलवे अंडरबायपास के नाम पर इस गेट को स्थायी रूप से बंद किया है. इसके बाद हालात और भी मुश्किल हो गए हैं. वाहनधारक तो किसी तरह वर्धा नदी के पास से करीब दो किमी का फेरा लगाकर आ-जा सकते हैं, लेकिन पैदल चलने वाले नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए यह रास्ता बेहद कष्टदायक है.


लंबा चक्कर काटने की कठिनाई के चलते सैंकड़ों विद्यार्थी और स्थानीय रेलवे पटरियां लांघकर एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच रहे हैं. यह स्थिति किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकती है. चिंता की बात यह है कि प्रस्तावित अंडरबायपास के लिए खोदा गया गड्ढा भी अब भर दिया गया है, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था की उम्मीद भी धुंधली पड़ गई है.


नागरिकों का कहना है कि जब तक अंडरबायपास या कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बनती, तब तक पहले की तरह रेलवे गेट पर कर्मचारियों की तैनाती कर सीमित समय के लिए गेट खोला जाए. इससे विद्यार्थियों और पैदल यात्रियों को राहत मिलेगी और किसी अनहोनी की आशंका को रोका जा सकेगा.

नागरिकों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है साथ ही नव-निर्वाचित विधायक राजेश बकाने और सांसद अमर काले से भी आग्रह किया जा रहा है कि वे इस मामले का संज्ञान लेकर रेलवे प्रशासन से समन्वय करें और सुरक्षित समाधान सुनिश्चित कराएं.

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