- हिंगणघाट के सरकारी अस्पताल में हंगामा
- जिला अस्पताल से लाई थी मशीन
wardha हिंगणघाट 23 दिसम्बर
हिंगणघाट के उपजिला अस्पताल में आयोजित महिला नसबंदी शिविर के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दूरबीन (लैप्रोस्कोपी) शल्यक्रिया के बीच मशीन में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। शल्यक्रिया नहीं होने से नाराज मरीजों के परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और डॉक्टरों से जवाब मांगा।
उपजिला अस्पताल में आज लैप्रोस्कोपी पद्धति से महिला नसबंदी शल्यक्रिया शिविर होना था। इसके लिए वर्धा जिला सामान्य अस्पताल से लैप्रोस्कोपी मशीन मंगाई गई थी। शल्यक्रियाओं के लिए डॉ. मनीषा नासरे एवं उनकी विशेषज्ञ टीम अस्पताल पहुंची थी।
शिविर में कुल 32 महिलाओं को भर्ती किया गया था, जिनमें से दो महिलाओं का रक्तचाप अधिक पाए जाने पर उन्हें शल्यक्रिया के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। शल्यक्रिया की प्रक्रिया जारी थी, तभी 17वीं महिला की शल्यक्रिया के दौरान मशीन में खराबी आ गई। मजबूरी में उस महिला की शल्यक्रिया अधूरी अवस्था में ही टांके लगाकर बंद करनी पड़ी। इसके बाद मशीन में आई तकनीकी खराबी के कारण आगे की सभी दूरबीन शल्यक्रियाएं रोक दी गईं।
स्थिति को संभालते हुए चार महिलाओं ने ओपन (टांके वाली) शल्यक्रिया के लिए सहमति दी। शेष नौ महिलाओं में से सात को पहले ही एनेस्थीसिया दिया जा चुका था, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती रखा गया है, जबकि दो महिलाओं को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। (machine shut down during the exact operation,)
उपजिला अस्पताल के वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. आशीष लांडे ने बताया कि लैप्रोस्कोपी मशीन में तकनीकी खराबी के कारण कुछ महिलाओं की शल्यक्रिया नहीं हो सकी। शेष महिलाओं की शल्यक्रियाएं आगामी दिनों में पुनः शिविर आयोजित कर की जाएंगी। फिलहाल एनेस्थीसिया देकर भर्ती रखी गई महिलाओं को 24 घंटे के भीतर छुट्टी देकर घर भेज दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि शिविर में कुल 16 महिलाओं की नसबंदी दूरबीन विधि से सफलतापूर्वक की गई, जबकि चार महिलाओं की ओपन शल्यक्रिया संपन्न हुई। समय पर कार्रवाई से कोई गंभीर अनहोनी टल गई, लेकिन घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
