- सेवाग्राम आश्रम की अध्यक्ष आशा बोथरा ने कहा
- तपोधन श्री कृष्णदासजी जाजू स्मृति समारोह
Wardha वर्धा 16 दिसम्बर
“जब तक हम स्त्री उत्पीड़न के खिलाफ खड़े नहीं होते और स्त्री-पुरुष समानता पर अमल नहीं करते, तब तक कोई अभियान पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकता। राजस्थान जैसे पीढ़ीवादी राज्य में महिलाओं को घर से बाहर निकालना और उनकी चुप्पी तोड़ना वाकई चुनौतीपूर्ण कार्य था।” उक्ताशय के विचार प्रमुख अतिथि गांधीवादी श्रीमती आशा बोथरा ने जाजू परिवार द्वारा आयोजित तपोधन श्रीकृष्णदास जाजू स्मृति कार्यक्रम में व्यक्त किए।
डॉ. सुहास जाजू के साक्षात्कार में जवाब देते हुए आशा बोथरा ने कहा कि माता-पिता द्वारा स्थापित ‘मीरा’ संस्था के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य तथा सामाजिक चुनौतियों व कुप्रथाओं को दूर करने का अथक प्रयास जारी है।
पुलिस सहयोग से स्थापित आधार केंद्र के जरिए अत्याचार से पीड़ित महिलाओं को सहारा और सुरक्षा प्रदान की जाती है। उदयपुर में एचआईवी पीड़ित स्त्री-पुरुष व उनके बच्चों, सेक्स वर्कर्स तथा ट्रांसजेंडर के लिए विशेष कार्यक्रम चल रहा है। विधवाओं को बिंदी लगाने, घूंघट हटाने तथा रात की पाली में काम करने जैसे कार्य भी जारी हैं।मंच पर आशा बोथरा की दोनों पुत्रियां व पुत्रवधू भी मौजूद रहीं। श्रीमती श्रद्धा ने कहा, “बदलाव की शुरुआत खुद के घर से होती है, वहां विरोध को सामंजस्य से दूर करना होता है।
“श्रीमती कीर्ति ने कहा, “नई पीढ़ी के विचारों को संस्था ने अपनाया है और समयानुसार नए कार्यक्रम व पद्धतियां शुरू की जा रही हैं।”श्रीमती ज्योति ने कहा, “घर के सारे काम सब मिलकर करें, पुरुष-स्त्री भेद न हो। मन परिवर्तन सेवा से होता है, विद्रोह से नहीं। परिवार का समर्थन सबसे बड़ा सहयोग है, तभी समानता आएगी।
“विगत 32 वर्षों से जाजू परिवार इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है, जिसमें देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं के रचनात्मक कार्यों का वर्धावासियों से परिचय कराया जाता है। संचालन डॉ. सुहास जाजू ने किया, जबकि डॉ. उल्हास जाजू ने आशा बोथरा के कार्यों की मीमांसा प्रस्तुत की। इस श्रृंखला की एक और कड़ी जोड़ते हुए आशा बोथरा को उनके कार्यों के विकास के लिए कृतज्ञता राशि भेंट की गई। उल्हास जाजू द्वारा रचित गीत डॉ. ऋचा व डॉ. श्रुति ने गाए। यह जानकारी माहेश्वरी मंडल समन्वयक राजकुमार जाजू ने दी।
