‘सेवा ही साधना’ के मंत्र से समाज में लाएं सकारात्मक बदलाव

  • अदानी समूह की डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा
  • एआईएचईआर के दीक्षांत समारोह में भाषण

  • Wardha वर्धा, 17 अक्टूबर 2026
    डिग्री प्राप्त करना केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है. विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए. ‘सेवा ही साधना है’ के मंत्र को आत्मसात कर शिक्षा, चिकित्सा और अनुसंधान के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना आवश्यक है. यह विचार अदाणी समूह की डॉ. प्रीति अदाणी ने एआईएचईआर (दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च) के 17वें दीक्षांत समारोह में व्यक्त किए.

डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि संस्थान के संस्थापक-कुलाधिपति दत्ताजी मेघे ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों, विशेषकर ग्रामीण तथा वंचित समुदायों तक पहुंचाने की दूरदृष्टि के साथ कार्य किया. सागर मेघे, समीर मेघे और विश्वविद्यालय की टीम इस विरासत को आगे बढ़ा रही है. अदाणी फाउंडेशन के साथ संस्थान का जुड़ाव शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा.

डॉ. प्रीति अदाणी ने बताया कि आगामी दो वर्षों में वर्धा और नागपुर परिसरों के अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा. इसके तहत आधुनिक चिकित्सा उपकरण, उन्नत क्लिनिकल अनुसंधान सुविधाएं और सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं मजबूत की जाएंगी. साथ ही अनुप्रयुक्त अनुसंधान, नवाचार और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी.उन्होंने कहा कि संस्थान का अनुसंधान रोगों की रोकथाम, शुरुआती पहचान, किफायती उपचार तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर केंद्रित रहेगा. देश के अन्य क्षेत्रों में भी परिसर विकसित कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने का लक्ष्य है. इस विकास यात्रा में वर्धा और नागपुर की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी.
स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि चिकित्सा और अन्य सेवा क्षेत्रों में ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय गरिमा का सम्मान भी जरूरी है. मरीजों को केवल उपचार ही नहीं, बल्कि भरोसा और सम्मान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इमर्सिव तकनीकों का विवेकपूर्ण उपयोग करने, तथ्यों की जांच करने और निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया.उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की प्रगति का वास्तविक लाभ समाज के जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचना चाहिए.
शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और समावेशन के माध्यम से सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं.इस अवसर पर उन्होंने 2,320 स्नातक विद्यार्थियों, 122 पीएचडी शोधार्थियों और 83 पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थी आत्मविश्वास, विनम्रता और करुणा के साथ आगे बढ़ें तथा अपने ज्ञान और उपलब्धियों से समाज की सेवा करें.मुख्य आंकड़ों से खबर शुरू करेंखबर को और संक्षिप्त करेंउद्धरण शैली में मुख्य संदेश लिखें

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