Wardha वर्धा, 19 अक्टूबर 2026
खेतों की कुंआ में पानी तल पर पहुंच चुका है। पानी की कमी से बागवानी सूखने के कगार पर है, जबकि रबी में चना और गेहूं की सिंचाई का सवाल गंभीर हो गया है। ऐसे में कुओं की खुदाई और बोरवेल करने पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंधों के कारण किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर आष्टी तालुके के किसानों ने तहसील कार्यालय पर आक्रोश मार्च निकाला और संबंधित शासन निर्णय में तत्काल संशोधन कर कुओं की खुदाई तथा बोरवेल के लिए अनुमति देने की मांग की।
बताया जाता है कि वर्धा जिले में कुओं की खुदाई और बोरवेल पर शासन निर्णय के तहत प्रतिबंध हैं। किसानों का कहना है कि इसका सीधा असर आष्टी कुओं के कृषकों पर पड़ रहा है। कई खेतों की विहिरों में पर्याप्त पानी नहीं है, जिससे नई खुदाई या वैकल्पिक जलस्रोत तैयार करना जरूरी हो गया है। लेकिन अनुमति न मिलने से ये काम नहीं हो पा रहे हैं और सिंचाई की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
बागवानी को बचाने के साथ ही चना और गेहूं जैसी रबी फसलों को भी पानी चाहिए। विहिरी खोदने पर रोक होने से वैकल्पिक पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
इस पृष्ठभूमि पर किसानों ने एकजुट होकर तहसील कार्यालय पर मार्च निकालकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार किसानों की समस्या को गंभीरता से लेकर निर्णय में संशोधन करे और विहिरी खुदाई व बोरवेल की अनुमति दे। यदि अनुमति देना संभव नहीं है, तो खेती के लिए वैकल्पिक पानी की व्यवस्था करे। तत्काल निर्णय न होने पर किसान भूख हड़ताल और रास्ता रोको आंदोलन करेंगे—ऐसी चेतावनी दी गई।
ज्ञापन सौंपते समय धाड़ी के सरपंच दिलीप भाकरे, विनोद सोनवणे सहित अंकुश राऊत, प्रवीण बिजवे, गुणवंत पेंदाम, आनंद वाघ, हरिभाऊ निंभोरकर, समीर वाघ, अक्षय नेहारे, विनोद लांडगे, राहुल गावंडे, रोशन राऊत, राहुल गुडदे, नंदलाल खौवशी, सागर कडू, हरिभाऊ जी. राऊत, प्रवीण दुधकवरे, मारोतराव दुधकवरे, प्रशांत ठाकरे, जुबेर पटेल, विनायक दुधकवरे, आशिष पडोळे, राहुल पडोळे, श्रीराम नेहारे, वासुदेव नेहारे, नरेंद्र चोरे, प्रल्हाद टेकाळे, काशिनाथ मानमोडे, शरद वरकड, प्रफुल मुदाने, छगन ढोरे, प्रवीण मोहिते, विजय गावंडे, प्रवीण धांदे और श्याम शिर्के सहित तालुके के कई किसान मौजूद थे।
