ब्रिटिश कालीन शकुन्तला फिर दौड़ेंगी

wardha आर्वी,10 जुलाई 2026
आर्वी और आसपास के क्षेत्र के लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ी ऐतिहासिक शकुंतला रेलवे (पुलगांव–आर्वी रेलमार्ग) के पुनर्जीवन की उम्मीद अब और मजबूत हो गई है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। महाराष्ट्र सरकार ने पहले की तरह इस परियोजना में 50 प्रतिशत आर्थिक भागीदारी देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसकी आधिकारिक जानकारी विधान परिषद में दी गई है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का श्रेय क्षेत्र के विधायक सुमित वानखेड़े के लगातार किए गए प्रयासों को दिया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर लगातार इस मुद्दे का पीछा किया, जिसके परिणामस्वरूप अब परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे भी पूरा हो चुका है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शकुंतला रेलवे का उल्लेख किए जाने के बाद इस परियोजना को नई गति मिली।

कभी क्षेत्र की जीवनरेखा थी शकुंतला रेलवे

ब्रिटिश शासनकाल में शुरू हुई शकुंतला रेलवे कभी आर्वी क्षेत्र की पहचान और आर्थिक गतिविधियों की मुख्य धुरी थी। शुरुआती दौर में भाप के इंजन से चलने वाली यह रेल बाद में डीजल इंजन से संचालित होने लगी। कपास, कृषि उपज और स्थानीय व्यापार के परिवहन के साथ-साथ हजारों यात्रियों के लिए यह रेलमार्ग जीवनरेखा साबित हुआ।

समय के साथ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से यह रेल सेवा बंद हो गई। इसके बाद से ही आर्वीवासियों की वर्षों पुरानी मांग रही कि इस ऐतिहासिक रेलमार्ग को फिर से शुरू किया जाए।

ब्रॉडगेज से विकास को मिलेगी नई रफ्तार

शकुंतला रेलवे के ब्रॉडगेज में परिवर्तित होने के बाद आर्वी का संपर्क सीधे देश के प्रमुख रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे स्थानीय व्यापार, कृषि उपज के परिवहन, औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही आम यात्रियों को तेज, सुरक्षित और किफायती रेल यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

राज्य सरकार देगी 50% हिस्सेदारी

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 4 जून 2026 को रेल मंत्रालय को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र सरकार इस परियोजना में 50 प्रतिशत आर्थिक भागीदारी देने के लिए तैयार है। राज्य सरकार के इस सकारात्मक रुख के बाद अब केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद और प्रबल हो गई है।

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