अभय बेदमोहता
Wardha सेलु 12 जनवरी
सेलू शहर में पिछले कुछ दिनों से चोरीयों की घटनाओं में आई भारी तेजी ने नागरिकों की नींद उड़ाकर रख दी है। अब तो चोरों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे दिनदहाड़े साहसी डकैतियों को अंजाम दे रहे हैं। पूरे शहर में डर और दहशत का माहौल है, लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुलिस अब तक एक भी चोरी की गुत्थी सुलझाने में कामयाब नहीं हो पाई है। इससे स्थानीय जनता में पुलिस प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
शहर में एक के बाद एक चोरीयों की वारदातें घट रही हैं। कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। पुलिस की जांच का चक्र घूमने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। आम जनता अब बेबस होकर यह सवाल पूछ रही है कि, "आखिर हम सुरक्षा के लिए कहां जाएं?" न केवल बड़ी चोरियां, बल्कि छोटी-मोटी उठाईगिरी की घटनाएं भी सड़कों और घरों के बाहर आम हो गई हैं।
फेरीवालों पर गहराया संदेह
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि शहर में रोजाना आने वाले अनजान फेरीवाले इन वारदातों के पीछे तो नही हो सकते हैं। चर्चा है कि ये फेरीवाले सामान बेचने के बहाने गलीकुचों में घूमकर घरों की ‘रेकी’ करते हो और मौका मिलते ही हाथ साफ कर देते हैं।
बढ़ते अपराधों को देखते हुए आक्रोशित नागरिकों ने नगर
शहर में आने वाले फेरीवाले का पंचायत में आधिकारिक पंजीकरण अनिवार्य किया जाए। आधार कार्ड और पहचान पत्र की गहन जांच के बाद ही उन्हें शहर में प्रवेश की अनुमति मिले।
शहर के बढ़ते विस्तार को देखते हुए मुख्य चौराहों और संवेदनशील शहर के सभी इलाकों में तत्काल CCTV कैमरे लगाए जाने पर विचार करें। नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से रात की गश्त बढ़ाने और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखने की अपील की है। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस जल्द ही इन चोरियों का पर्दाफाश नहीं करती, तो अपनी सुरक्षा के लिए जनता को मजबूरन सड़क पर उतरकर आंदोलन का रास्ता तो नही अपनाना होगा?
