- अकाल स्थिति पर उबाठा का 4 को मुंबई में मोर्चा
- उबाठा की ओर से आज किया गया ऐलान
- बीजेपी की पलटवार सलाह
- महाराष्ट्र में राजनीति गरम
Mumbai मुंबई, 30 सितम्बर 2026
सूखे की स्थिति में पूरी तरह किसानों के साथ खड़े रहते हुए सरकार ने उन्हें कर्जमाफी की तीसरी किस्त भी दी है। आने वाले समय में सरकार किसानों की मदद करेगी। हालांकि, महाराष्ट्र पर सूखे का संकट मंडरा रहा है, ऐसे में मुंबई में 4 तारीख को निकाले जाने वाले मोर्चे के नाम पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च को टालें और वह मदद मराठवाड़ा-विदर्भ के हमारे किसानों के लिए घोषित करें, ऐसा तंज भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने बुधवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर कसा।
भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने कहा, “राज्य के किसान संकट में हैं और इसके बावजूद आपने मोर्चा निकाला, ऐसा इतिहास आपके नाम पर दर्ज होगा। इसलिए मुंबई में मोर्चा निकालकर नौटंकी करने के बजाय सूखाग्रस्त किसानों की मदद करना बेहतर होगा। उद्धव ठाकरे ने कभी संवेदनशीलता नहीं दिखाई। हालांकि, राज ठाकरे से उम्मीद है कि कम से कम इस सूखे के दौर में वे भारी खर्च कर मोर्चा नहीं निकालेंगे। मौजूदा स्थिति में सभी राजनीतिक दलों के लिए किसानों के साथ मजबूती से खड़ा होना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो महाराष्ट्र का किसान उबाठा गुट और मनसे को कभी माफ नहीं करेगा और कभी आपको वोट नहीं देगा।”
इंडिया गठबंधन की बैठक में उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री रहते हुए भी बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होते थे। क्योंकि उन्हें वर्क फ्रॉम होम की आदत है। राज्य के किसानों के लिए क्या वर्क फ्रॉम होम से हल चलाया जा सकता है? क्या वर्क फ्रॉम होम से बुआई की जा सकती है? ऐसी अवधारणा वे पेश कर रहे थे। इसलिए महाराष्ट्र की जनता ने उन्हें घर बैठकर वर्क फ्रॉम होम का ही काम करने की नसीहत दी। अब इस मोर्चे को भी वे घर बैठकर ऑनलाइन तरीके से निकालें। आपके लाखों समर्थक उस ऑनलाइन मोर्चे में शामिल होंगे। कम से कम इससे बचने वाले पैसे तो हमारे किसानों को दें, ऐसा तंज भी उन्होंने कसा।
उन्होंने कहा, “सरकार कर्ज लेगी। किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। कर्ज लेने में कोई गलत बात नहीं है। इससे पहले भी सरकार ने समय-समय पर कर्ज लिया है। किसान संकट में हैं और हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे हैं। जरूरत पड़ी तो कर्ज लेंगे, लेकिन किसानों को बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। किसानों को बेसहारा छोड़ने की परंपरा उबाठा गुट की थी, जबकि किसानों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की परंपरा महायुति की है। इसलिए यह सरकार किसानों की और देवाभाऊ की है। आप लोगों की तरह रोज 100 करोड़ रुपये की वसूली करने और मातोश्री-2 बनाने की हमारी परंपरा नहीं है,” ऐसी आलोचना बन ने की।
