वर्धा, 28 सितंबर 2026 — सामाजिक संस्था “युवा परिवर्तन की आवाज” ने राज्य सरकार और वर्धा जिल्हाधिकारी को भेजे गए आवेदन में जिले के सात तालुकों में सूखे से प्रभावित किसानों, खेतिहर मजदूरों और पशुपालकों के लिए तात्कालिक राहत की मांग की है। राज्य सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 तालुकों में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया था, जिनमें वर्धा के सात तालुकें भी शामिल हैं।
संस्था ने कहा है कि खरीफ फसलों का व्यापक नुकसान, पेयजल व चारे की कमी, कर्ज का बढ़ता बोझ और ग्रामीण रोजगार में कमी को देखते हुए प्रशासन से तुरंत कदम उठाने की अपेक्षा है। आवेदन में प्रमुख मांगों में प्रत्येक सूखा प्रभावित किसान को प्रति हेक्टेयर न्यूनतम ₹1,00,000 अंतरिम DBT सहायता, सभी गांवों में GPS व फोटो सहित पारदर्शी पंचनामे कर अंतिम नुकसान भरपाई की समयसीमा तय करना तथा फसल ऋण और कृषि संबंधी कर्जों की वसूली पर अविलंब रोक शामिल हैं।
इसके अलावा आवेदन में कहा गया है कि दुष्काळग्रस्त क्षेत्रों में कृषी पम्पों की बिजली नहीं काटी जाए और बिजली बिलों में पूर्ण छूट दी जाए; जलसंकटग्रस्त गांवों में तत्काल टैंकर से पेयजल उपलब्ध कराया जाए; पशुपालकों को मुफ्त चारा, पानी व पशु-वैद्यकीय सेवाएं मुहैया कराई जाएं; तथा कपास, सोयाबीन, तूर, ज्वार व फलबाग नुकसानग्रस्त किसानों के लिए फसल-प्रति विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा की जाए। खेतमजूरों के लिए रोजगार गारंटी योजनाओं के अंतर्गत अधिक से अधिक कार्य तुरंत शुरू करने और सूखा प्रभावित विद्यार्थियों की शैक्षणिक व परीक्षा फीस माफी की भी मांग की गई है। साथ ही जिले में जिला स्तरीय सूखा नियंत्रण कक्ष स्थापित कर प्रत्येक तालुका का साप्ताहिक सार्वजनिक रिपोर्ट प्रकाशित करने का आग्रह रखा गया है।
आवेदन में चेतावनी भी दी गई है कि यदि प्रशासन त्वरित राहत नहीं देता और किसी किसान की आत्महत्या जैसी घटना हुई तो उसकी स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच करवाई जाए; जांच में लापरवाही सिद्ध होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। युवा परिवर्तन की आवाज़ की प्रतिनिधि रीता पाटील ने कहा, “सूखे की घोषणा कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; तुरंत धन और पानी की व्यवस्था की जाए।” संस्था ने कहा कि मांगों पर कार्रवाई न होने पर वे संवैधानिक व लोकतांत्रिक मार्गों से प्रदर्शन करेंगे।
