wardha वर्धा, 27 सितम्बर 2026
दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (डीएमआईएचईआर) के नए नाम और भविष्य की योजनाओं को लेकर आयोजित पत्र परिषद में वाइस चांसलर डॉ. ललितभूषण वाघमारे ने संस्थान की आगामी स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान संबंधी योजनाओं की जानकारी दी.
वाघमारे ने बताया कि अदानी समूह देशभर में 15 अस्पताल बनाने जा रहा है. प्रत्येक अस्पताल लगभग 1200 बेड का होगा. इन सभी अस्पतालों का मुख्य केंद्र वर्धा (सावंगी) ही रहेगा. इस निर्णय से वर्धा को देशभर के मेडिकल कॉलेजों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है. इस संकल्पना पर अमल करने के लिए समूह के संस्थापक गौतम अदानी की ओर से करीब 60 हजार करोड़ रुपए खर्च की तैयारी है.
वर्धा और नागपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हर साल 100 करोड़ रुपए वर्धा तथा 100 करोड़ रुपए नागपुर में खर्च करने का आश्वासन दिया है. वहीं दूसरी ओर एआईएचईआर ने नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिहाज से निर्णय लिया है कि संस्थान में पहले से उपलब्ध सभी सुविधाएं जारी रखी जाएंगी. इसके अलावा मरीजों को अतिरिक्त कौन-कौनसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, इस पर भी काम शुरू है. अस्पताल में कम कीमत में दवाइयां उपलब्ध कराने तथा विभिन्न बीमारियों की जांच शहर में सबसे कम दरों में उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं.
इसका उद्देश्य आम नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है.डॉ. वाघमारे ने बताया कि कैंसर उपचार की सुविधा को आधुनिक बनाया जा रहा है. इसके लिए यहां सात मंजिला इमारत का निर्माण किया जाएगा. एक ही छत के नीचे कैंसर की जांच, उपचार सहित आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. उन्होंने बताया कि अनुसंधान के क्षेत्र में काम करने वाली विश्वस्तरीय 3 प्रमुख कंपनियां रिसर्च के क्षेत्र में कार्यरत हैं.
इन कंपनियों को सावंगी लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. पत्र परिषद में संस्थान के चीफ सविर्सेज आफिसर रविंद्र मेहरे, सलाहकार, डाॅ. राजीव बोरले , डीन सोनाली चाैधरी, डाॅ. श्वेता पिसुलकर उपस्थित थीं.बाक्स—–यूजीसी ने दी मंजूरी..वाइस चांसलर वाघमारे ने बताया कि दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (डीएमआईएचईआर) डीम्ड यूनिवर्सिटी को अपना नाम बदलकर ‘अदानी इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च’ करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मंजूरी मिल गई है. संस्थान के लिए यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
