- मातम में डूबा परिवार
- 15 साल की उम्र में दुनिया छोड़ी
Wardha वर्धा, 25 सितम्बर 2026
किताबें थामकर भविष्य के सपने बुनने वाला मात्र 15 वर्षीय अरमान युसुफ़ शाह अब बस याद बनकर रह गया। घोराड़ के यशवंत विद्यालय में दसवीं कक्षा का छात्र अरमान पिछले आठ दिन से नागपुर के ‘नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट’, जामठा में गले के कैंसर से जी-जान से लड़ रहा था, पर बुधवार शाम उसकी जिद और परिवार की उम्मीदें नाकाफी साबित हुईं और वह दुनिया छोड़ गया।
शुरुआती इलाज सावंगी के अस्पताल में हुआ, लेकिन तबियत बिगड़ने पर उसे नागपुर स्थानांतरित किया गया था। परिवार और मित्रगण लगातार दुआ करते रहे और उम्मीद बँधाए बैठे थे, पर नियति के आगे यह संघर्ष अधूरा रह गया और उसकी जिन्दगी की मशाल बुझ गई।
शांत, मेधावी और मिलनसार छात्र
अरमान पढ़ाई में तेज, स्वभाव से शांत और दोस्तों-शिक्षकों में बेहद प्रिय था। वह भविष्य में कुछ बड़ा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था और अपने परिवार को संभालने के सपने देखता था। दसवीं के वर्ष में ही जीवन रुक जाना न सिर्फ परिवार के लिए वरन पूरे समुदाय के लिए सदमे जैसा है — उन आँखों के सामने तरसते हुए कई सपने अधूरे रह गए।
अरमान का परिवार आर्थिक रूप से असहाय है; पिता (बकरियाँ) पालकर घर का गुजारा करते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद अरमान ने पढ़ाई नहीं छोड़ी थी और परिवार उसकी पढ़ाई में आशाएं बाँधे हुए था।
अब बेटे को खोने से माता-पिता पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा है और परिवार पर आर्थिक व भावनात्मक दोनों तरह के असर स्पष्ट हैं।
अरमान का परिवार संत केजाजी महाराज मंदिर परिसर, घोराड़ में रहता है। कल तक विद्यालय और मंदिर के आसपास दोस्तों के संग खेलता, हँसता यह बालक आज बस याद बनकर रह गया है। शिक्षक, सहपाठी, रिश्तेदार और नेबर्स सब भावुक हैं और उसके लिए दुआएँ कर रहे हैं।
15 वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है, पर उसकी स्मृतियाँ और सपने घोराड़ की मिट्टी से हमेशा जुड़े रहेंगे। अरमान का अंतिम संस्कार गुरुवार को मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार किया …।
