- बाघ के हमले में मारा गया किसान
- जिलाधिकारी, पालक मंत्री ने मुंह फेरा
- ग्रामीणों ने लगाया प्रशासन पर आरोप
- जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना
wardha वर्धा, 12 सितम्बर 2026
रायपुर जंगली गांव में बाघ के हमले में किसान भगवान धुर्वे की मौत को 72 घंटे बीत चुके हैं। लेकिन अब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। धुर्वे का शव सेलू के ग्रामीण अस्पताल में है। प्रशासन और सरकार की कथित उदासीनता से नाराज रायपुर जंगली के नागरिक और धुर्वे परिवार के सदस्य शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे । पालकमंत्री पंकज भोयर और जिलाधिकारी वान्मथी सी के उनसे मिलने नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने मांगें पूरी होने तक जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया।
9 सितम्बर की शाम किसान धुर्वे का बाघ ने शिकार किया था। उसके बाद से ग्रामीण और धुर्वे परिवार का गांव में धरना शुरू था. ग्रामीणों की मांग है कि मृतक परिवार को 1 करोड़ रु. मुआवजा दिया जाए या परिवार के एक सदस्य को नाैकरी दी जाए।
इन मांगों पर चर्चा करने के लिए ग्रामीणों का आग्रह था कि जिलाधिकारी वान्मथी सी, पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर रायपुर जंगली में पीड़ित परिवार से मिलकर ग्रामीणों से बात करें। लेकिन तीन दिन बाद भी जिलाधिकारी रायपुर जंगली में पीड़ित परिवार से नहीं मिली। जबकि पालकमंत्री डाॅ. पंकज भोयर के शीघ्र चर्चा करने का आश्वासन मिलता रहा। आखिर शुक्रवार को जिलाधिकारी की ओर से उपविभागीय अधिकारी कुश मोटवानी, तहसीलदार गांव में पहुंचे. लेकिन ग्रामीणों ने चर्चा से साफ इनकार कर दिया।
12 सितम्बर की दोपहर धुर्वे परिवार, ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। लेकिन यहां भी उपविभागीय अधिकारी कुश मोटवानी, अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक विनोद चाैधरी चर्चा के लिए आए, जिससे ग्रामीणों का रोष बढ़ गया. ग्रामीणों की मांग है कि जब तक मांगों पर वरिष्ठ अधिकारी, पालकमंत्री की ओर से आश्वासन नहीं मिलता, वे मृतक का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे और जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना जारी रहेगा।
सांसद अमर काले ने मृतक भगवानजी धुर्वे के परिवार को सरकार की ओर से एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि 25 लाख रु. की सहायता अपर्याप्त है। सांसद काले ने पालकमंत्री पंकज भोयर पर जमकर निशाना साधा। काले ने कहा कि ग्रामीणों की मांग केवल इतनी थी। कि पालकमंत्री रायपुर जंगली पहुंचकर मृतक के परिवार से चर्चा करें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें। चर्चा से जो भी रास्ता निकलता, ग्रामीण उसे स्वीकार करने के लिए तैयार थे। राज्य के तीन मंत्री वर्धा आकर चले गए, लेकिन पालकमंत्री अब तक नहीं पहुंचे, जिससे ग्रामीणों में रोष है।
