Wardha वर्धा, 19 फरवरी : जिले में पेलिएटिव केयर (उपशामक देखभाल) कार्यक्रम शुरू हो गया है. स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में 15 हजार मरीजों की पहचान की है. यह संख्या सर्वेक्षण में बढ़ेगी. इस कार्यक्रम पर अमल के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू किया गया है ताकि मरीजों को राहत प्रदान की जा सके.
कैंसर का अंतिम चरण, किडनी या लीवर रोग, बिस्तर पर पड़े मरीज तथा वृद्धावस्था के असाध्य रोगों से पीड़ित मरीज जो अस्पताल तक जाकर उपचार नहीं करा सकते हैं, ऐसे मरीजों को उनके घर में ही सेवा देने के लिहाज से सरकार ने पेलिएटिव केयर कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत प्रशिक्षित स्वास्थ्य सेविकाएं, आशा वर्कर, आंगनवाड़ी सेविकाएं, एएनएम और सीएचओ मरीजों के घर जाकर जांच करेंगे, उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराएंगे. साथ ही परिजनों की काउंसलिंग भी की जाएगी. आशा स्वयंसेविका या आरोग्य वर्धिनी केंद्र के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी पेलिएटिव केयर के मरीजों का पंजीयन कर रहे हैं.
प्रतिक्रिया
जिला शल्यचिकित्सक डॉ. सुमंत वाघ ने बताया कि कार्यक्रम अंतर्गत स्वास्थ्यकर्मियों को प्राथमिक उपचार सामग्री से युक्त विशेष किट प्रदान की जाएगी. दर्द कम करने की मॉर्फिन जैसी दर्दनाशक दवाएं और अन्य आवश्यक सामग्री जिला अस्पताल से लेकर उपकेंद्र स्तर तक निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी. ग्रामीण अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुछ बेड आरक्षित रखे गए हैं, जबकि जिला स्तर पर 10 बेड आरक्षित रखे गए हैं. उपचार के लिए इसके लिए अलग टीम गठित की गई है. इस योजना के अंतर्गत कैंसर, मधुमेह, किडनी या लीवर के अंतिम चरण के रोगियों, स्ट्रोक, पार्किन्सन, डिमेंशिया तथा वृद्धावस्था के असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को घर-घर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी.
