Wardha वर्धा, 27 सितम्बर 2026
राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए सरकार ने किसानों को हरसंभव सहायता देने की तैयारी शुरू कर दी है. फसल पंचनामे और निरीक्षण का काम जारी है. किसी भी किसान को सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा. किसानों की आंखों के आंसू पोंछना और उन्हें इस संकट से बाहर निकालना सरकार की पहली प्राथमिकता है, ऐसा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा.
बावनकुले ने कहा कि सूखे के कारण किसी किसान को आत्महत्या करने की नौबत न आए, यह सरकार की जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री ने विकास के अन्य विषयों को फिलहाल अलग रखते हुए किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहने का निर्णय लिया है. राज्य सरकार केंद्र की सहायता का इंतजार किए बिना किसानों को अपने स्तर पर मदद देने की भूमिका में है.
उन्होंने कहा कि सूखा घोषित होने के बाद किसानों को मिलने वाली वास्तविक सहायता निर्धारित करने में पंचनामे महत्वपूर्ण हैं. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के नियमों के अनुसार सहायता तय की जाती है. फिलहाल करीब 10 प्रतिशत पंचनामे हुए हैं. पूरी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही सटीक निर्णय लिया जा सकेगा. पंचनामे के बिना सहायता देना संभव नहीं है. इसलिए पंचनामे अचूक पद्धति से पूर्ण करना सरकार की प्राथमिकता है. इसके लिए विधायक, सांसद और अधिकारी मैदान में काम कर रहे हैं.
#कारंजा तहसील को लेकर जल्द निर्णय#
वर्धा जिले में कारंजा तहसील सूखे के ट्रिगर में शामिल नहीं हो सकी है. हालांकि, पंचनामों के बाद कारंजा तहसील की स्थिति भी गंभीर होने की बात स्पष्ट होगी. इसके बाद कारंजा तहसील को लेकर जल्द निर्णय लिया जाएगा, ऐसा बावनकुले ने बताया.
मुख्यमंत्री ने उनकी अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कैबिनेट सब-कमेटी गठित की है. इस समिति की बैठक प्रत्येक मंगलवार शाम 5 बजे होगी. सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार की पूरी तैयारी है, ऐसा उन्होंने कहा.
समारोहों पर खर्च कम करने की अपील
बावनकुले ने राज्य में सत्कार समारोहों, पुष्पगुच्छ, हार तथा बड़े पैमाने पर होने वाले उत्सवों पर अनावश्यक खर्च से बचने की अपील की. सार्वजनिक और व्यक्तिगत कार्यक्रम सादगी से आयोजित कर बचाई गई राशि मुख्यमंत्री सहायता निधि में देने का आह्वान उन्होंने किया. राज्य के उद्योगपतियों और बड़े व्यापारियों से भी मुख्यमंत्री सहायता निधि में योगदान देने की अपील की गई है.
उन्होंने कहा कि उद्योग और व्यापार जगत की मदद से सीएसआर के माध्यम से जलसंधारण के विभिन्न कार्य किए जा सकते हैं. वर्तमान संकट के साथ ही भविष्य में पेयजल और किसानों के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने तथा भूजल स्तर बढ़ाने पर भी सरकार का ध्यान है.
विपक्ष से राजनीति से दूर रहने की अपील
बावनकुले ने विपक्षी दलों से सूखे के मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए. किसानों और खेत मजदूरों के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. सरकार के सामने कोई सुझाव या समस्या हो तो विपक्ष उसे कैबिनेट सब-कमेटी के सामने रख सकता है. उन्होंने कहा कि समिति के अध्यक्ष के रूप में वे विपक्ष के सुझाव सुनने के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल मीडिया के माध्यम से बयानबाजी कर किसानों के मन में भ्रम और भय पैदा नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते वे घर से बाहर नहीं निकले और अब खेतों की मेड़ पर जा रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को किसानों के बीच जाना चाहिए, लेकिन सूखे के समय राजनीति के बजाय किसानों की मदद के लिए सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए.
लाडकी बहिन, शक्तिपीठ पर असर नहीं
सूखे के कारण मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना और शक्तिपीठ परियोजना पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा. इन योजनाओं के बजट और सूखे से संबंधित प्रावधान अलग हैं. हालांकि, सरकार को प्राथमिकताओं के अनुसार कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य और योजनाओं पर खर्च कम करना पड़ सकता है. नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े खर्चों में कटौती नहीं की जाएगी, ऐसा बावनकुले ने स्पष्ट किया.
