केस दर्ज नहीं करने के बदले मांगे 25 हजार

  • पुलिसकर्मी समेत दो गिरफ्तार
  • निजी व्यक्ति की मदद से स्वीकारी रिश्वत

wardhaवर्धा, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) वर्धा ने सफल जाल बिछाकर देवली पुलिस थाने के एक पुलिस कांस्टेबल और एक निजी व्यक्ति को रिश्वतखोरी के मामले में हिरासत में लिया है। आरोपियों ने एक मामले में गिरफ्तारी से बचाने के लिए शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की थी। कार्रवाई के दौरान 5 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार किए जाने की बात सामने आई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता के खिलाफ देवली पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 118(1) के तहत मामला दर्ज है। इस मामले के संबंध में पुलिस कांस्टेबल विकास देवतले (34), बकल नंबर 742, देवली पुलिस थाना, जिला वर्धा ने शिकायतकर्ता को 9 अगस्त 2026 को थाने बुलाया था। आरोप है कि मामले में गिरफ्तार नहीं करने के लिए उसने शिकायतकर्ता से 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। बातचीत के बाद 23 हजार रुपये देने की मांग की गई।

शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था। इसलिए उसने वर्धा एसीबी से शिकायत की। शिकायत के आधार पर 12 अगस्त, 19 अगस्त और 20 अगस्त को पंचों के समक्ष रिश्वत की मांग की पुष्टि की गई। इस दौरान आरोपी ने पहले 15 हजार रुपये की मांग की और बातचीत के बाद 5 हजार रुपये रिश्वत लेने पर सहमति जताई।

रिश्वत की रकम निजी व्यक्ति को दी

20 अगस्त को एसीबी ने देवली पुलिस थाना क्षेत्र में जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान पुलिस कांस्टेबल विकास देवतले ने 5 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की और यह रकम निजी व्यक्ति आशीष नारायणराव पाटणकर (30), वार्ड क्रमांक 10, मनोहर मंदिर, देवली के पास दे दी। आरोपी को संदेह होने पर उसने निजी व्यक्ति के पास से रिश्वत की रकम वापस अपने कब्जे में ले ली और सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से रकम को कहीं छिपा दिया।

एसीबी की टीम ने आरोपी पुलिसकर्मी की तलाश कर उसे हिरासत में लिया। साथ ही निजी व्यक्ति आशीष पाटणकर को भी जांच के लिए हिरासत में लिया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 12 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 के तहत देवली पुलिस थाने में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू है।

कार्रवाई पुलिस निरीक्षक कान्होपात्रा बन्सा के नेतृत्व में की गई। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक संदीप मुपडे कर रहे हैं, जबकि पर्यवेक्षण पुलिस उपअधीक्षक राकेश साखरकर ने किया। कार्रवाई को पुलिस अधीक्षक डॉ. दिंगबर प्रधान, अपर पुलिस अधीक्षक माधुरी बाविस्कर और अपर पुलिस अधीक्षक विजय माहुलकर के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।

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