- सांसद अमर काले की राज्य सरकार को सलाह
- विश्रामगृह पर 10 करोड़ खर्च पर विवाद ?
wardha वर्धा,24 अप्रैल
राज्य की आर्थिक स्थिति और सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर किसान कर्ज और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है, वहीं वर्धा में सरकारी विश्रामगृह के निर्माण और नवीनीकरण पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना ने लोगों का ध्यान खींचा है।
हाल ही में जिले के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने विश्रामगृह का निरीक्षण कर नई इमारत के निर्माण और पुरानी इमारत के नवीनीकरण के निर्देश दिए। वर्तमान में मौजूद दो इमारतों में 9 वीआईपी सूट हैं, जिनके आधुनिकीकरण, किचन और पैंट्री निर्माण पर लगभग 7.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही चार नए आधुनिक सूट के निर्माण के लिए करीब 2.5 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है।
इसी बीच, जिले और राज्य में किसानों की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। खेती की बढ़ती लागत, बाजार में अनिश्चित दाम और कर्ज का बोझ किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। वहीं, गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि ने आम परिवारों के घरेलू बजट पर भी असर डाला है। महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ समय पर न मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
इन परिस्थितियों में यह सवाल उठ रहा है कि जब कई बुनियादी योजनाओं—जैसे सिंचाई, छात्रवृत्ति, आवास, स्वास्थ्य सेवाएं और किसानों के मुआवजे—के लिए संसाधनों की कमी बताई जाती है, तब ऐसे बड़े खर्च को किस प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जा रही है।
वर्धा, जिसे महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है, वहां इस तरह के खर्च को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि प्रशासन का ध्यान बुनियादी समस्याओं के बजाय ऐसे प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है।
इस मुद्दे पर सांसद अमर काळे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए विलासिता से जुड़े खर्चों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
सरकार से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि प्रस्तावित खर्च की समीक्षा कर संसाधनों का उपयोग आम जनता के कल्याण और जरूरी योजनाओं के लिए किया जाए। वहीं, सार्वजनिक निर्माण विभाग के ठेकेदारों द्वारा भुगतान में देरी के कारण काम प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील बन गया है।
पूरे मामले में अब नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और आगे किस तरह की प्राथमिकताएं तय की जाती हैं।
