बंदर से शिक्षिका का बैग वापस दिलाने की कोशिश में गंवाई जान
* नागपुर के शिक्षक की मौत;
* दीपावली से पहले परिवार में मातम
* कारंजा घाड़गे में अंतिम संस्कार
Nagpur नागपुर, 7 नवंबर 2026
किसी ने सोचा भी नहीं था कि हंसते-खेलते पचमढ़ी की सैर पर निकले शिक्षक विजय नाईक कभी लौटकर घर नहीं आएंगे. जिस सफर पर वे अपनों के साथ कुछ खुशनुमा पल बिताने निकले थे, वही उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया.
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पचमढ़ी में शुक्रवार, 6 नवंबर की सुबह एक दर्दनाक हादसे में नागपुर के शिक्षक विजय नाईक (42) की गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई. एक शिक्षिका का बंदर द्वारा छीना गया बैग वापस दिलाने की कोशिश में उनका संतुलन बिगड़ा और वे खाई में जा गिरे. दीपावली से ठीक पहले हुए इस हादसे ने नाईक परिवार की खुशियां छीन लीं. वर्धा जिले के कारंजा (घाडगे) तहसील के उनके पैतृक गांव सुसुंद्रा में उनका अंतिम संस्कार किया गया.
मदद करते हुए जिंदगी से हारे
विजय नाईक नागपुर के रामदासपेठ स्थित सोमलवार स्कूल में शिक्षक थे. उन्हें साहसिक पर्यटन का शौक था. स्कूल में एनसीसी की जिम्मेदारी संभालने के कारण वे कुछ एनसीसी शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ पचमढ़ी की सैर पर गए थे. उनके पिता हरिदास नाईक भी उनके साथ थे.
गुरुवार रात नागपुर से बस द्वारा रवाना होकर सभी शुक्रवार तड़के पचमढ़ी पहुंचे. सुबह विजय ने फोन पर अपने परिजनों से बातचीत भी की थी. किसी को क्या पता था कि अपनों से यह उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी.
सुबह करीब 7.30 बजे सभी प्रसिद्ध सनराइज पॉइंट पहुंचे. इसी दौरान जया नामक शिक्षिका का बैग एक बंदर छीनकर ले गया. विजय ने बैग वापस लाने का प्रयास किया और उन्हें इसमें सफलता भी मिली. लेकिन बैग लौटाने के बाद अचानक उनका पैर फिसल गया और देखते ही देखते वे गहरी खाई में जा गिरे. पलक झपकते ही खुशियों से भरा माहौल चीख-पुकार में बदल गया.
दो बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
विजय नाईक मूल रूप से वर्धा जिले की कारंजा (घाडगे) तहसील के सुसुंद्रा गांव के निवासी थे. नागपुर के भगवाननगर, बैंक कॉलोनी में वे पत्नी अर्चना और दो बेटियों हर्षदा व हर्षवी के साथ रहते थे. हर्षदा दसवीं में, जबकि हर्षवी छठवीं कक्षा में पढ़ रही है.
दीपावली की खुशियों पर छाया मातम
विजय नाईक परिवार के प्रमुख आर्थिक और भावनात्मक आधार थे. उनके पिता वृद्ध हैं और दोनों बेटियां अभी पढ़ाई कर रही हैं. पत्नी अर्चना घर पर ट्यूशन कक्षाएं चलाकर परिवार की जिम्मेदारी में हाथ बंटाती थीं. परिवार की सारी उम्मीदें विजय से जुड़ी थीं. लेकिन एक पल के हादसे ने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी. विजय का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव सुसुंद्रा लाया गया. शनिवार को गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया.