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भरत नागपाल हत्या कांड के आरोपियों पर मकाैका

विदर्भ अपडेट
०९ मार्च २०२६, ०१:२४ सायं.
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  • मास्टर माइंड अब भी परदे के पीछे


wardha वर्धा, 9 मार्च
वरोरा पुलिस ने बामर्डा रेती घाट में पैसों के विवाद को लेकर हुई हत्या के मामले में बड़ा कदम उठाया है. रेत माफिया गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद अवैध रेत कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन के मार्गदर्शन में की गई है।

पुलिस के अनुसार १ मार्च २०२६ को शिकायतकर्ता पंकज वानखेड़े ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बामर्डा रेत घाट पर रेत के पैसों को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि आरोपियों ने पोकलैंड मशीन को घाट से बाहर निकलनेवाले रास्ता पर खड़ा करके रास्ता बंद कर दिया. इसके बाद तलवार व लकड़ी के डंडों से हमला कर भरत दयानंद नागपाल की बेरहमी से पिटाई की।

 हमले के दौरान आरोपियों ने तलवार से वार करने के बाद उन्हें नदी के गहरे पानी में फेंक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। वाहनों को जलाने की भी कोशिशघटना के दौरान आरोपियों ने शिकायतकर्ता और उसके साथ मौजूद लोगों के साथ भी मारपीट की। साथ ही उनके वाहनों में तोड़फोड़ की और डीजल डालकर वाहनों को जलाने का प्रयास किया। 

  इस मामले में पहले बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।  इस मामले में पुलिस ने   १२ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें प्रमुख रूप से, वर्धा निवासी अमोल रामचंद्र कामडी, सौरभ दिलीपसिंह, अक्षय विजयराव खडसे, उदय भास्कर वांदिले , नितिन यशवंत कामडी, अजय उर्फ गोलूदीपसिंह इरपा, प्रकाश शंकर कसारे, प्रवीण कावडूजी वासेकर,गीतेश वसंतराव सातपुते, प्रफुल्ल सूर्यभान उमाटे, सुनील नारायणराव झोरे और अतुल पुरुषोत्तम मोटघरे शामिल हैं।

 जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध रेत चोरी, अवैध परिवहन, जुआ और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे और आर्थिक लाभ के लिए अवैध गतिविधियां चला रहे थे। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम १९९९ की धारा ३(१), ३(२), ३(३) और ३(४) के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया।

 इस कार्रवाई को निम्न अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया:पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन ,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इश्वर काटकडे, पुलिस उपधीक्षक संतोष बाकल,  पुलिस निरीक्षक ओमप्रकाश सोनटक्के  साथ ही स्थानीय अपराध शाखा और पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों ने भी इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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